सुनिल बर्मन@मालखरौदा(एचकेपी 24 न्यूज).देश का भविष्य बेहतर बन सके इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार बच्चों की लिखाई-पढ़ाई पर पानी की तरह पैसा बहा रही है। सरकारी स्कूलों में बच्चों को यूनीफार्म,मध्यान्ह भोजन, मुफ्त किताबें सहित अन्य सुविधाएं सरकार उपलब्ध कराने में कोई कसर बाकी नहीं रख रही है।लेकिन इन्हीं में से कुछ स्कूल ऐसे है जहां बच्चों का शोषण करने में कोई गुरेज नहीं किया जा रहा है।ग्राम चरौदा मे संचालित होने वाला शासकीय प्राथमिक शाला का भी ऐसा ही कुछ शनिवार 1 फरवरी को दिखने को मिला।एचकेपी 24 न्यूज टीम का शनिवार 1 फरवरी को सुबह शाला संचालन होने के समय शालाओ के स्थिति को जानने दौरा जारी था।
जब एचकेपी 24 न्यूज टीम चरौदा पहुंची।तब चरौदा के शासकीय प्राथमिक शाला के कुछ बालिकाए शाला परिसर का झाडू लेकर गोबर से लिपाई कार्य करने मे व्यस्त थे।हमारा एचकेपी 24 न्यूज टीम के सदस्य एक किनारे पर खडे होकर समझने का प्रयास कर रहे थे कि आखीर स्वीपर कहां है।बालिकाओ को आखीर क्यूं झाडू लेकर गोबर से शाला परिसर का सफाई करने को पड रहा है।जैसे ही तस्वीर लेने कैमरा निकाला गया।बालिकाओ का नजर कैमरा मे पडते ही बालिकाएं झाडू लेकर गोबर से लिपाई करने का कार्य को छोड कर बाल्टी लेकर पास का ही तालाब की ओर जाने लगे।जब शासकीय शाला मे बच्चे पढाई-लिखाई करने के अलावा अन्य कार्य करते नजर आते है।तब शासकीय शालाओ को लेकर लोगो मे नकारात्मक संदेश जाता है।वही शासकीय शालाओ मे अपने -अपने बच्चो को पढाने-लिखाने पालकगण दूरी बनाने लगते है।इस ओर विभागीय अधिकारियो को विशेष ध्यान देने का आवश्यकता है।ताकि शासकीय शालाओ मे कोई भी छात्र-छात्रा पढाई-लिखाई के अलावा अन्य कार्य करते नजर नही आए।
आप लोगो के माध्यम से स्कूल में बच्चों से कराए जा रहे कार्यों की जानकारी मिली है। यदि बच्चों से पढ़ाई-लिखाई के अलावा अन्य कोई कार्य कराया जा रहा है।तो उचित कार्रवाही की जाएगी।बच्चों से स्कूल में काम कराने का कोई प्रावधान नहीं है।सभी स्कूल में इसके लिए चपरासी नियुक्त किए गए हैं।
एम.एल.प्रधान,बीईओ,मालखरौदा
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