सुनिल बर्मन@जांजगीर-चांपा(एचकेपी 24 न्यूज).हिन्देश एजुकेशन हेल्थ एण्ड वेलफेयर फाउण्डेशन के संस्थापक अध्यक्ष सामाजिक कार्यकर्ता हिन्देश कुमार यादव ने किसानो को उनका स्वयं के हित मे फसल कटाई होने पश्चात् खेत मे शेष बचे पैरा,ठूंठ सहित अन्य अवशेषो को आग से नही जलाने का अपील किया है।श्री यादव ने कहा कि फसलों के अवशेषों को जलाने से उनके जड़,तना,पत्तियों में संचित लाभदायक पोषक तत्वों का नष्ट हो जाता है।फसल अवशेषों को जलाने से मृदा ताप में बढ़ोत्तरी होती है।जिसके कारण मृदा के भौतिक,रसायनिक एवं जैविक दशा पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।पादप अवशेषों में लाभदायक मित्र कीट जलकर मर जाते हैं।जिसके कराण वातावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। पशुओं के चारे की व्यवस्था पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।फसलों के अवशेष डण्ठल के रूप में खड़े होते हैं ।उनके जलाने पर नजदीक के किसानों के फसलों में आग लगने की संभावना बनी रहती है।जिससे खड़ी फसल एवं आबादी में अग्निकाण्ड होने की संभावना बनी रहती है।वहीं आस-पास के खेत,खलिहान एंव मकान में भी अग्निकाण्ड के कारण अत्यधिक नुकसान उठाना पड़ता है।किसी भी फसल के अवशेष को अपने हित मे जलाए नहीं बल्कि मृदा में कार्बनिक पदार्थों की वृद्धि हेतु पादप अवशेषों को मृदा में मिलावें/ सड़ावें।फसलों के अवशेष खेत में रखने के अनेको फायदे होते है।फसल अवशेष मृदा में मिल जाते हैं।जो विघटित होकर जैविक खाद, कार्बन व अन्य आवश्यक तत्वों में परिवर्तन हो जाते हैं। मृदा में नमी बनी रहती है।जल ग्रहण क्षमता बढ़ती है। जैविक कार्बन एंव उर्वरा शक्ति बढ़ती है। साथ ही पोषक तत्वों एवं मित्र कीटों की बढ़ोतरी होती है।अधिक गर्मी एंव ठंड में भूमि के तापमान को नियंत्रण में रहता है।पशुओं के लिए उपयुक्त चारा उपलब्ध होता है। फसलों के अवशेष न जलाने से स्वास्थ्य नुकसान से बचा जा सकता है।उर्वरा शक्ति में बढ़ोतरी होती है।फसलों के अवशेष रखने से खेत में नाईट्रोजन की मात्रा बढ़ती हैजो फसल के लिए आवश्यक तत्व है। वहीं अगली फसल को कम खाद की आवश्यकता होती है।श्री यादव ने फसल कटाई करने के साथ अवशिष्टो को आग से नही जलाने का निवेदन करनेऋके साथ-साथ ही अपने-अपने खेत के पैरा को अपने गांव के नजदीक वाला गौठान मे दान करने का निवेदन किया है।
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