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कोरिया:-सुराजी गांव योजना के तहत जिले में निर्मित गौठानों से 13 हजार से अधिक पशुओं की की जा रही है देखभाल…

सुनिल वर्मन@कोरिया(एचकेपी 24 न्यूज).छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी-नरवा, गरूवा, घुरूवा अउ बारी, गांव ल बचाना हे संगवारी के क्रियान्वयन हेतु संचालित सुराजी गांव योजना के तहत जिले में 45 गौठान पूरी तरह तैयार कर लिये गये हैं। जिसमें जिले के विकासखंड बैकुण्ठपुर के ग्राम सोरगा, कटकोना, नरकेली, सलबा एवं बडगांव, विकासखंड सोनहत के ग्राम सलगवांकला, पोंडी, बेलिया, घूघरा, बसेर, केषगवां, कुषहा, रामगढ एवं पुसला, विकासखंड खडगवां के ग्राम बरदर, चिरमी, देवाडांड, दुग्गी, गिध्दमुडी, कौडीमार, खंधौरा, पेण्ड्री, इंदरपुर एवं मंगोरा, विकासखंड मनेन्द्रगढ के ग्राम रोझी, गरूडडोल, सरभोका, मोरगा, मुसरा, बरबसपुर, ताराबहरा, हर्रा एवं लोहारी तथा विकासखंड भरतपुर के ग्राम  तोजा, देवगढ, माडीसरई, भगवानपुर, जनकपुर, जमथान, कंजिया, अक्तवार, लरकोडा, बरौता, बेलगांव एवं बहरासी में निर्मित गौठान शामिल हैं। इन गौठानों के माध्यम से 13 हजार 449 पशुओं की देखभाल की जा रही है।इन गौठानों में पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है। आम, अमरूद, कटहल जैसे फलदार पौधों का रोपण किया गया है। वहीं जाली से घेरा भी किया गया है। गौठान में पौधों का उचित देखभाल करने वाले ग्रामीणों को 15 रूपये प्रति पौधे की मान से प्रोत्साहन राषि षासन द्वारा दिये जाने का प्रावधान है। इसके अलावा राज्य षासन ने प्रतिमाह एक निष्चित राषि गौठान समितियों को देने के लिए भी घोशणा की है। गौठान में निर्मित चारागाह में नेपियर घास का रोपण किया गया है। इसे कई बार काट सकते हैं। यह एक हाई प्रोटीन घास है। इसे सूखे घास के साथ मिलाकर पशुओं को देने से दुग्ध उत्पादन में वृध्दि के साथ साथ उनके सेहत में भी सुधार होता है। गौठान के प्रति ग्रामीणों का कहना है कि गौठान बनने से गांव सुरक्षित हो गया है। अब उनके कृशि को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हो रहा है। गौठान परिसर में कोटना, पेयजल टंकी, चारा रखने के लिए मचान आदि की व्यवस्था पर्याप्त मात्रा में कर ली गई है। इन गोठानों में पशुओं को खाते-पीते, विचरण करते, गोठानों में बने शेडों में विश्राम करते देखा जा रहा है। गोठानों में पशुओं की देखभाल, पशुओं के इलाज के भी इंतजाम किए गए हैं, पीने के पानी के लिए पानी टंकी हैं खाने के लिए घास और चारागाह बनाए गए हैं। इससे प्राप्त गोबर से खाद बनाया जाएगा। जो गांव के अतिरिक्त आय का जरिया बनेगा।

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