जांजगीर-चांपा(हिन्देश की पाठशाला 24 न्यूज)।स्वच्छता एवं सावधानी अपनाकर जापानीज इन्सेफेलाईटिस रोग से बचा जा सकता है। यह वेेक्टर जनित रोग है। संक्रमि क्यूलेक्स विषाणु प्रजाति के मच्छर काटने से जेई वायरस का संक्रमण होता हैै। यह वायरस जंगली पशु, सूअर में पाया जाता है। यह रोग 1 से 15 वर्ष की आयु तक के बच्चों को ज्यादा प्रभावित करता है। इसकें अलावा यह रोग किसी भी उम्र के व्यक्ति को कभी भी हो सकता है। जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि सामान्य सावधानियां अपनाकर इस रोग के संक्रमण से बचा जा सकता है। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग, शरीर को पूरा ढंका हुआ वस्त्र पहनकर मच्छरों से बचाव हेतु दवाई, धुंआ आदि से छिड़काव कर, घर से आसपास साफ-सफाई कर एवं पानी को जमा न होने द, स्वच्छ अथवा उबले पानी का उपयोग आदि से इस रोग के संक्रमण से बचा जा सकता है। इस रोग के लक्षण के बारे में बताया गया है कि 5 से 7 दिन तक लगातार बूखार, शरीर में ऐंठन, मानिसक बदलाव, बेहोशी, मांशपेशियों में कमजोरी आदि सामान्य लक्षण है। बेहोश मरीज को पीठ के बल लेटायें, बेहोशी या झटके की स्थिति में मरीज के मुंह में कुछ न डालें। ऐसे लक्षण पाये जाने पर स्वास्थ्य केन्द्र से संपर्क जांच एवं उपचार करवाना चाहिए। इस रोग के लक्षण पाये जाने पर जांच के लिए जगदलपुर के सेंटिनल सर्वेलेंस चिकित्सालय, मेडिकल कालेज जगदलपुर में सेंपल भेजकर इस रोग की पुष्टि की जाती है।
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