जांजगीर-चांपा(एचकेपी 24 न्यूज)।बाल विवाह रोकने के लिए सरकार हर साल प्रयास करती है।कानून भी सख्त बनाए जा रहे हैं। न केवल घरवाले बल्कि पूजा कराने वाले पंडित से लेकर बारातियों के भी खिलाफ मामला दर्ज करने का प्रावधान है। जिला प्रशासन भी लगातार लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाता है।इसके बावजूद जिले में बाल विवाह के लिए लोग जागरूक हो नहीं रहे हैं।शुक्रवार 26 अप्रैल का शाम के समय बम्हनीडीह विकास खंड के ग्राम कपिस्दा में एक व्यक्ति के घर उसकी बेटी की शादी थी। 26 अप्रैल को उसके घर बारात आ चुकी थी। विवाह की पूरी तैयारी हो गई थी। रात में शादी होती फेरे पड़ते इसके पहले ही सूत्रों की सूचना पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी की टीम पहुंची टीम ने उस विवाह को रोका। टीम ने जब बालिका की अंकसूची की जांच की तो उसकी उम्र 15 वर्ष 11 माह निकली। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को बुलाकर कानून की जानकारी दिया। इसके बाद बारात खाली हाथ वापस लौटी।जिला बाल संरक्षण विभाग को 24 अप्रैल को यह सूचना मिली कि नवागढ़ विकासखंड के ग्राम अमोरा में नाबालिग की शादी की तैयारी चल रही है। सूचना पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी गजेंद्र सिंह जायसवाल टीम तैयार कर पुलिस विभाग से समन्वय करते हुए ग्राम अमोरा पहुंचे। वहां किशोरी की अंकसूची की जांच की गई। जांच में यह पाया गया कि बालिका की उम्र 17 साल 4 माह थी।इस बालिका की शादी अक्षय तृतीया को होनी तय थी। मौके पर पहुंचे विभागीय अधिकारियों ने बालिका के माता पिता को बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराया गया एवं समझाईश के बाद सरपंच एवं स्थानीय लोगों की उपस्थिति में बालिका के माता-पिता की सहमति से बालिका का विवाह रोका गया है। दल में जिला बाल संरक्षण इकाई से गजेंद्र सिंह जायसवाल, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, सुश्री पूजा तिवारी, संरक्षण अधिकारी सुशील पटेल एवं अमित भोई आउटरीच वर्कर तथा परियोजना जांजगीर से बम्हनीडीह से अरूणा तिवारी, दुर्गेश नंदनी यादव, टीआई सी तिग्गा सारागांव, भगवान सिंह राज सहायक उपनिरीक्षक, राम कृष्ण खैरवार ,चाइल्ड लाइन समन्वयक अश्वनी साहू शामिल थे ।
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