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जांजगीर-चाम्पा:-जिला अस्पताल का बुरा हाल,बरामदे में नवजातों का कराना पड़ रहा उपचार…

जांजगीर-चांपा(एचकेपी 24 न्यूज)।महिलाओं व नवजातों के प्रति संवेदनाओं का बखान करने वाली सरकार और उसके नौकरशाह इनके लिए कतई संवेदनशील नहीं है। प्रसूताओं द्वारा नवजातों को जन्म देने के बाद नवजातों को बेड व ठंडी हवा तक नसीब नहीं हुए। इतनी भीषण गर्मी में फर्श पर लेटकर इलाज कराना पड़ा।स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदारों की वजह से जिला अस्पताल में नवजातों की दुर्दशा हो रही है। यहां नवजातों के बेहतर इलाज के लिए सिक न्यूबार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) है। यहां जन्म के 15 दिन तक नवजातों का इलाज किया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है बल्कि बरामदे में नवजातों का इलाज किया जा रहा है। ऐसा हाल जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल का हाल है।नवजात कोई एक दिन का है तो कोई दो दिन का है। नवजातों की देखभाल करने के लिए करोड़ों रुपए की लागत से एसी से सुविधायुक्त एसएनसीयू वार्ड भी जिला अस्पताल में है। दो दिन की नवजात भीषण गर्मी में फर्श पर लेटे है। इस नजारा को देखते हुए तत्काल कूलर वाला वार्ड या एसएनसीयू वार्ड में शिफ्ट करना चाहिए, लेकिन जिला अस्पताल में जिम्मेदारों की मानवता खत्म सी हो गई। किसी को भी इन नवजातों पर तरस नहीं आई, वाह रहे जिला अस्पताल। इस संबंध में सिविल से बात किया गया तो उनका कहना था कि ऐसा हो ही नहीं सकता। सभी वार्ड में नया कूलर लगाया गया है।प्रसव के बाद महिलाओं को कम से कम तीन दिन तक अस्पताल में स्वच्छ बेड पर रखा जाता है। नवजात की हालत बिगडऩे पर उसे एसएनसीयू में भर्ती कर लिया जाता है। बच्चे को दूध पिलाने के लिए मां को भी साथ में जाना पड़ता है। मां को कम से कम तीन दिन तक स्वच्छ बेड पर रखा जाता है लेकिन यहां तो दूसरे दिन ही नवजात को फर्श पर लेटा दिया गया।अभी जिला में पारा 43 पार हो चुका है। प्रसूता वार्ड में लगा कूलर सप्ताह भर से खराब है। भीषण गर्मी होने के कारण खासकर दिन में वार्ड में एक पल रहना नागवार गुजर रहा है। वार्ड में लगा पंखा भी गर्म हवा दे रहा है। जिससे व्याकुल होकर माताएं अपने एक से दो दिन की नवजातों को लेकर बरामदे में फर्श लाकर लेट गए हैं। ताकी यहां पर खुली हवा मिल सके।प्रसूता वार्ड के तरफ पूरा गंदगी का नजारा है। जहां से कभी जहरीले जीव जंतु आ सकते है। जहरीले जीव जंतु को छोड़े तो अगर चूहे भी आ जाएं तो वह भी नवजात के लिए बड़ी बात है। ऐसी घटना प्रदेश के अन्य अस्पताल में हो भी चुका है। जहां चूहा ने नवजात के अगूंठा को काट दिया था। जबकि वह बेड पर था। यहां तो नवजात फर्श पर लेटे है।

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