जांजगीर-चाम्पा(एचकेपी 24 न्यूज)।आईपीएस पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चाम्पा श्री मति पारुल माथुर बताती है,कि पुलिस सेवा उनका ड्रीम जॉब है,न सिर्फ भविष्य बल्कि अगले जन्म में भी पुलिस में रहना चाहूंगी। वर्दी पहनने के बाद तो आत्मविश्वास प्रबल हो जाता है। यह मेरे पिता का भी सपना था।वर्दी में मैं उन्हें अपने साथ खड़ा महसूस करती हूं।पापा मेरे लिए सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने हर कदम पर मुझे प्रोत्साहित किया है। उनका सपना था कि मैं आईपीएस बनूं। मैं बचपन से ही उनके प्रोफेशन से प्रभावित थी। जब मैं 9वीं क्लास में थी, तभी सोच लिया था कि मुझे आईपीएस अधिकारी बनना है और इसकी तैयारी में दिन-रात जुट गई।कभी-कभी पापा के साथ उनके कार्यस्थल पर भी जाती थी।यह बात जांजगीर-चाम्पा पुलिस अधीक्षक आईपीएस अधिकारी श्री मति पारुल माथुर ने अपने पापा रिटायर्ड डायरेक्टर (नेशनल पुलिस एकेडमी) राजीव माथुर के साथ उनके कार्य के अनुभव को शेयर किया। उन्होंने कहा कि उनके काम को देखकर समझ पाई थी, कि अगर पब्लिक से सीधे जुडऩा है या समाज के लिए कुछ करना है,तो वो इसी प्रोफेशन में कर सकते हैं।बचपन से ही लड़कियों को वर्दी में देखकर अच्छा लगता था और उसे देखकर गजब का आकर्षण होता था। मेरी मम्मी राजकुमार कॉलेज में टीचर थीं, लेकिन मुझे पापा का प्रोफेशन अच्छा लगता था। कभी-कभी पापा की वर्दी भी पहन लेती थी। मुझे पहली महिला आईपीएस किरण बेदी भी काफी प्रभावित करती थीं।इस जॉब में रहते हुए किसी पीडित को तत्काल राहत देने का मौका मिलता है। जब किसी का सही मायने में मदद होती है, दिल से तसल्ली मिलती है। बस इसी बात का सुकून है, अन्य जॉब, बिजनेस में भी पैसा कमा सकते है, लेकिन इसमें समाज सेवा का मौका मिल रहा है। पुलिस में रहते हुए बहुंत अच्छा लगता है खुद को गौरान्वित महसूस करती हूं। बिना किसी तनाव लिए जॉब को एंजोय करती हूं। लड़कियों को इस जॉब में आना चाहिए।मेरा मानना है कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम साक्षर तो होना ही चाहिए। वह अपना भला-बुरा समझ सके। विशेषकर लड़कियों को, क्योंकि शिक्षा से देश दुनिया की जानकारी भी मिलती है, इससे विश्लेषण करने की क्षमता आती है।
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