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रायपुर :- हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के जनसूचना अधिकारी को 6 प्रकरणों पर 60 हजार रूपए का अर्थदण्ड और प्रत्येक प्रकरण पर 300-300 रूपए क्षतिपूर्ति का आदेश..प्रथम अपीलीय अधिकारी पर भी स्पष्टीकरण प्राप्त कर अनुशासनात्मक कार्यवाही के निर्देश…

रायपुर 25 फरवरी 2021(एचकेपी 24 न्यूज).लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार एवं प्रशासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं जिम्मेदारी को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 प्रभावशील है। सरकार के क्रियाकलापों के संबंध में नागरिकों को जानकार बनाने के लिए यह अधिनियम मिल का पत्थर साबित हो रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयुक्त श्री ए.के.अग्रवाल ने 6 प्रकरणों पर हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के जनसूचना अधिकारी को 10-10 हजार रूपए का अर्थदण्ड अधिरोपित करते हुए 300-300 रूपए क्षतिपूर्ति का आदेश दिया है। साथ ही प्रथम अपीलीय अधिकारी हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विष्वविद्यालय को कर्तव्य के निर्वहन में शिथिलता बरतने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(2) के तहत स्पष्टीकरण प्राप्त कर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने कुलसचिव को निर्देशित किया गया।

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत श्री अंशुल पाराशर ने हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के जनसूचना अधिकारी को आवदेन किया, जिसमें विष्वविद्यालय में प्रथम एवं द्वितीय नियुक्ति के समय विश्वविद्यालय में कार्यरत श्री दिनेश लालवानी एवं री अनिल सिंह की शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव की जानकारी के साथ ही विश्वविद्यालय में नियुक्ति के लिए भरे गए आवेदन पत्रों और सभी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति की मांग की थी। विश्वविद्यालय में कार्यरत समस्त कर्मचारियों के नियुक्ति तिथि और उन्हे प्राप्त वेतन की आवेदन दिनांक तक जानकारी के साथ ही विश्वविद्यालय में कार्यरत समस्त शिक्षकों की वरिष्ठता सूची की मांग की थी।
जनसूचना अधिकारी से समय सीमा पर जानकारी और दस्तावेज प्राप्त नहीं होने से आवदेक ने विधि विश्वविद्यालय कार्यालय में प्रथम अपील प्रस्तुत किया। प्रथम अपीलीय अधिकारी के द्वारा आवेदन को निरस्त किए जाने से क्षुब्ध होकर आवेदक ने जनसूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी के विरूद्व छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील प्रस्तुत किया। छत्तीसगढ़ राज्य आयोग के सूचना आयुक्त श्री ए.के.अग्रवाल ने द्वितीय अपील प्रकरण क्रमांक ए/1316/2016 के आवेदनों का अवलोकन कर अधिनियम के तहत अपीलार्थी और जनसूचना अधिकारी को सुनने के पष्चात अपीलार्थी को 5 वर्ष के बाद भी जानकारी नहीं प्रदाय करने सूचना का अधिकार अधिनियम के विपरीत है। हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के जनसूचना अधिकारी (अनुभाग अधिकारी) श्रीमती संजना धर्मराज को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(1) के तहत 10 हजार रूपए का अर्थदण्ड 300 रूपए क्षतिपूर्ति की राषि अधिरोपित करते हुए कुलसचिव हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को निर्देशित किया कि अधिरोपित अर्थदण्ड की राशि को दोषी जनसूचना अधिकारी के वेतन से कटौती कर कोष में जमा कराने की कार्यवाही सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा प्रथम अपीलीय अधिकारी हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को कर्तव्य के निर्वहन में षिथिलता बरतने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(2) के तहत स्पष्टीकरण प्राप्त कर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने कुलसचिव को निर्देशित किया गया।
इसी प्रकार श्री अंशुल पाराशर ने द्वितीय अपील प्रकरण क्रमांक ए/1317/2016  विश्वविद्यालय में उपयोग किए जा रहे वाहनों के उपयोगकर्ता को आबंटन से संबंधित नोटशीट के साथ ही लाॅगबुक की प्रतिलिपि, द्वितीय अपील प्रकरण क्रमांक ए/1318/2016 में विश्वविद्यालय में 2011 से अवेदन दिनांक तक किराए के वाहन पर खर्च की गई राशि का पूर्ण विवरण सहित जानकारी चाहा था।  द्वितीय अपील प्रकरण क्रमांक ए/1319/2016 विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर आवेदन दिनांक तक समस्त कार्यकारिणी की बैठक का एजेण्डा और कार्यवाही विवरण, द्वितीय अपील प्रकरण क्रमांक ए/1320/2016 विश्वविद्यालय में मार्च 2011 से आवेदन दिनांक तक विश्विद्यालय में हवाई यात्रा में हुए खर्च का विवरण और यात्राकर्ताओं के नाम हवाई यात्रा की पात्रता एवं कारण सहित दस्तावेज और द्वितीय अपील प्रकरण क्रमांक ए/1321/2016 विश्वविद्यालय में मार्च 2011 से आवेदन दिनांक तक हो रहे निर्माण कार्य और अन्य कार्य का नाम, निविदा की राशि, कार्य पूर्ण होने की अवधि ओर आबंटित राशि सहित ठेकेदार का नाम, प्रत्येक निर्माण कार्य और अन्य कार्य के लिए बनाए गए मेजरमेंट बुक की अभिप्रमाणित प्रति प्रदाय करने आवेदन में उल्लेख किया था।
आवेदक श्री अंशुल पाराशर ने जनसूचना अधिकारी को उक्त 5 आवेदन दिया  किन्तु जनसूचना अधिकारी से समय सीमा पर जानकारी और दस्तावेज प्राप्त नहीं होने क्षुब्ध होकर आवदेक ने विधि विश्वविद्यालय कार्यालय में प्रथम अपील प्रस्तुत किया। प्रथम अपीलीय अधिकारी के द्वारा आवेदन को निरस्त किए जाने से क्षुब्ध होकर आवेदक ने जनसूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी के विरूद्व छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील प्रस्तुत किया।
छत्तीसगढ़ राज्य आयोग के सूचना आयुक्त श्री ए.के.अग्रवाल ने द्वितीय अपील प्रकरण क्रमांक ए/1317/2016, ए/1318/2016, ए/1319/2016, ए/1320/2016 और ए/1321/2016 के आवेदनों का अवलोकन कर कहा कि अधिनियम के तहत अपीलार्थी और जनसूचना अधिकारी को सुनने के पश्चात अपीलार्थी को 5 वर्ष के बाद भी जानकारी नहीं प्रदाय करना सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा के  विपरीत है। हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के जनसूचना अधिकारी (अनुभाग अधिकारी) श्रीमती संजना धर्मराज को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(1) के तहत 10 हजार रूपए का अर्थदण्ड 300 रूपए क्षतिपूर्ति की राषि अधिरोपित करते हुए कुलसचिव हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को निर्देषित किया कि अधिरोपित अर्थदण्ड की राशि को दोषी जनसूचना अधिकारी के वेतन से कटौती कर कोष में जमा कराने की कार्यवाही सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा प्रथम अपीलीय अधिकारी हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को कर्तव्य के निर्वहन में शिथिलता बरतने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(2) के तहत स्पष्टीकरण प्राप्त कर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने कुलसचिव को निर्देशित किया गया।

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