सुनिल बर्मन@मालखरौदा(एचकेपी 24 न्यूज).जांजगीर-चांपा जिला के लगभग साढ़े तेरह हजार तालाबों में मछली पालन की संभावना को देखते हुए।जिले में तीसरा मछली बीज उत्पादन केन्द्र (फिशरी यूनिट) मालखरौदा तहसील के ग्राम चरौदा में तैयार किया जा रहा है।जिसका शनिवार 11 जनवरी को दोपहर 1 बजे हिन्देश एजुकेशन हेल्थ एण्ड वेलफेयर फाउण्डेशन गैर सरकारी संगठन के अध्यक्ष संस्थापक हिन्देश कुमार यादव ने अवलोकन किया।
इस यूनिट से क्षेत्र के दो हजार से अधिक किसानों को लाभ मिलेगा।इसके साथ ही मत्स्य विभाग को भी इस यूनिट से प्रति वर्ष 8 लाख रुपए का आय होगा।श्री यादव निर्माणधीन फिशरी यूनिट का अवलोकन करने पहुंचे।तब कोई भी मौके पर उपस्थित नही था।देख रेख करने जिनको जिम्मेदारी सौपा गया है।उनका उपस्थित नही होने से ही पता चलता है,कि कितना अत्यधिक लापरवाही बरता जा रहा है।करोडो रुपए के लागत से निर्माण कार्य चल रहा है।जिसका देख रेख करने कोई भी उपस्थित नही मिला था।अहाता का निर्माण कार्य अभी अपूर्ण है।वही स्थिति देख लगा कि अभी निर्माण कार्य पूरी तरह से पूर्ण नही हुआ है।वही निर्माण कार्य वर्तमान मे जारी नही है।जैसा स्थिति देख कर लग रहा था।निर्माण कार्य को लेकर एक बोर्ड लगा है।उसमे निर्माण कार्य शुरु होने का तिथि जरुर लिखा है।लेकिन कब तक पूर्ण करना है।उस जगह को रिक्त छोड दी गयी है।जिसे देख कर श्री यादव ने नाराजगी व्यक्त किया।वही निर्माण कार्य गुणवत्ताविहिन की गयी है।उक्त निर्माण कार्य के स्थिति का अवलोकन करने पश्चात् श्री यादव ने कहा कि जिस तरह से करोडो रुपए के लागत से फिशरी यूनिट का निर्माण कार्य हो रहा है।वह संतोषप्रद नही है।निर्माण कार्य गुणवत्तायुक्त होने चाहिए।जिसमे किसी भी तरह का लापरवाही नही बरते जाने चाहिए।इस बारे मे कलेक्टर से लिखित पत्र मे शिकायत कर निर्माण कार्य मे बरते जा रहे लापरवाही को बन्द करवाने एंव निर्माण कार्य गुणवत्तायुक्त करवाने आग्रह की जाएगी।इस यूनिट के प्रारंभ होने से मालखरौदा, डभरा, सक्ती, जैजैपुर विकासखण्ड क्षेत्र के मछली पालन करने वाले किसानों को मछली बीज के लिए जांजगीर कुलीपोटा अथवा रायगढ़ जिला नहीं जाना पड़ेगा। किसानों को स्थानीय स्तर पर ही बीज उपलब्ध होने से परिवहन खर्च व बीज के नष्ट होने की संभावना कम होगी।फिशरी यूनिट का निर्माण एक करोड़ 79 लाख 34 हजार रुपए की लागत से किया जा रहा है। फिशरी यूनिट का निर्माण 25 एकड़ में किया जा रहा है। जिसमें 1.6 हेक्टेयर में 4 ब्रुडर पाउण्ड, 2.8 एकड़ में रिरिंग पाउण्ड 14 नग, एक पैकिंग शेड कम चाैकीदार कक्ष, गोदाम एक, कल्चर हेचरी नौ नग, वाचिंग टावर, ओवरहेड टैंक और स्पान रिसिविंग पुल का निर्माण होना है।इस यूनिट से स्पान उत्पादन 300 लाख और स्टेफ्राई उत्पादन 50 लाख नग प्रतिवर्ष होगा। इससे करीब 2000 हितग्राहियों को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही 8 लाख रुपए प्रतिवर्ष विभागीय आय भी होगी।श्री यादव ने यूनिट के विभिन्न ईकाइयों नर्सरी, हेचरी, जलस्त्रोत, पानी स्टोरेज टैंक, स्टाफ क्वार्टर आदि का अवलोकन किया।
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